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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के नवनियुक्त चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक पद की शपथ - 03/01/2021

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नाम श्रीमती आनंदीबेन मफतभाई पटेल
जन्म तारीख 21 नवंबर, 1941
जन्म स्थान खरोद, विजापुर तालुका, जिला मेहसाणा।
स्थायी पता 'धरम', शान बंगलोस के पास, शिलज अहमदाबाद।
वर्तमान पता राजभवन, मध्यप्रदेश भोपाल
शिक्षा एमएससी, एमएड (गोल्ड मेडलिस्ट)।
व्यवसाय सेवानिवृत्त प्राचार्य (मोहिनाबा गर्ल्स हाई स्कूल, अहमदाबाद) एवं समाज-सेवा।
रूचि अध्ययन, लेखन, यात्रा, जनसम्पर्क।
स्कूली शिक्षा के दौरान मेहसाणा जिला के स्कूल स्पोर्टस फेस्टिवल में वर्ष 1988 में 'वीर बाला' पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1988 में गुजरात राज्य के 'श्रेष्ठ शिक्षक' पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1990 राष्ट्रीय स्तर के 'श्रेष्ठ शिक्षक' सम्मान से सम्मानित हुई।
मोहिनाबा कन्या विद्यालय की दो छात्राओं को तैरना नही जानती थी उसके बावजूद नर्मदा नदी में डूबने से बचाने के लिए गुजरात सरकार के 'वीरता पुरस्कार' से नवाजा गया।
वर्ष 1999 में पटेल जागृति मंडल, मुंबई द्वारा 'सरदार पटेल पुरस्कार।
वर्ष 2000 में श्री तपोधन ब्राह्मण विकास मण्डल द्वारा 'विद्या गौरव' पुरस्कार।
वर्ष 2005 में पटेल समुदाय द्वारा 'पाटीदार शिरोमणि' पुरस्कार दिया गया।
अम्बु भाई पुरानी व्यायाम विद्यालय, राजपीपला द्वारा भी सम्मानित किया गया।
वर्ष 1998 मांडल विधानसभा क्षेत्र जिला अहमदाबाद से चुनकर विधायक बनी। वर्ष 1998 से 2002 शिक्षा (प्रारंभिक, माध्यमिक, वयस्क) एवं महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रही।
पाटन विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2002 से दूसरी बार विधायक बनी और गुजरात में शिक्षा मंत्री लगातार चुनाव जीत नही पाते थे ऐसी मान्याताओं को गलत साबित किया। वर्ष 2002 से 2007 तक शिक्षा (प्रारंभिक, माध्यमिक, वयस्क), उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, खेल, युवा एवं सांस्कृतिक गतिविधि मंत्री के पद पर रहीं।
वर्ष 2007 में पाटन विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक बनी। वर्ष 2007 से 2012 तक राजस्व, आपदा प्रबंधन, सड़क एवं भवन, राजधानी परियोजना, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रही।
वर्ष 2012 में अहमदाबाद शहर के घाटलोडिया विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार लगातार विधायक बनी तथा राज्य में सबसे अधिक वोटों से जीती। वर्ष 2012 से 2014 तक राजस्व, सूखा राहत, भूमि सुधार, पुनर्वास, पुनर्निर्माण, सड़क एवं भवन, राजधानी परियोजना, शहरी विकास और शहरी आवास मंत्री रही।
22 मई 2014 से 7 अगस्त, 2016 तक गुजरात राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री रही।
चौथी वर्ल्ड वूमेन्स कान्फ्रेंस बीजिंग (चीन) में भारत सरकार के दल में शामिल हुई।
वर्ष 1996 में भारतीय संसदीय दल के साथ बुलगारिया की यात्रा एवं फ्रांस, जर्मनी, हालैण्ड, इंग्लैण्ड, नीदरलैंड, अमेरिका, कनाडा एवं मेक्सिको आदि की शिक्षा अध्ययन यात्राएँ की हैं।
वर्ष 2002 में कॉमन वेल्थ पार्लियामेन्ट्री एसोसिएशन की गुजरात शाखा के दल के साथ नामीबिया - साउथ अफ्रीका में 48वीं कान्फ्रेंस में शामिल हुईं।
सितम्बर 2009 में आपने लंदन में 'विलेज इंडिया' प्रोग्राम में गुजरात का प्रतिनिधित्व किया ।
मई 2015 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी के साथ गुजरात के व्यापारिक प्रतिनिधि मंडल के साथ बतौर मुख्यमंत्री चीन का प्रवास किया।
गरीब व मध्यम वर्ग के परिवारों को मुफ्त इलाज के लिए मां वात्सल्य‍ योजना लाई।
सभी गरीब वर्गो के विधार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु युवा स्वावलंबन योजना बनाई।
गुजरात को 100% ODF (खुले में शौच-मुक्त) का अभियान चलाया।
गुजरात को टोल टैक्स (गैर व्यावसायिक वाहनों के लिए) फ्री बनाया।
सभी महिलाओं के लिए कैसर की जांच एवं मुफ्त इलाज प्रारंभ किया।
नर्मदा के पानी को खेत तक पहुंचाने के लिए शाखा नहर, लघु नहर, उपलघु नहर के लिए सर्वसम्मति से जमीन संपादन का सफलता पूर्वक अभियान चलाया।
सबसे कम समय में 100 से ज्यादा नगर नियोजन योजना को मंजूरी दी।
राजनै‍ति‍क गतिविधियाँ
  • 1987 में राजनीति से जुड़ी इस दौरान भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष, प्रदेश इकाई की भाजपा उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पद पर रही।

  • 1992 में भाजपा द्वारा आयोजित कन्या कुमारी से श्रीनगर तक की एकता यात्रा में शामिल होने वाली गुजरात की एकमात्र महिला रही। कश्मीर में तिरंगा नही लहरा देने की आतंकवादियों की धमकी के बावजूद 26 जनवरी 1992 में श्रीनगर के लालचौक में राष्ट्रीय ध्वज फहराने में शामिल थी।
साहित्यिक गतिविधियाँ समय-समय पर 'धरती', 'साधना' एवं 'सखी' पत्रिकाओं के लिये लेख लिखती रही।


The objective of any higher education system should be to make it an instrument both of development and pursuit of the civilisational goals of society. It should be designed for imparting technical and other skills so that the youth is able to participate both in the process of social as well as economic development of the society. These goals' have been spelt out in their statements by the famous educationists through the last few decades, by the Education Commission of India and by the eminent visionaries like our Farmer President Dr. Radhakrishnan.

The Governor is expected to be a person of undoubted ability and position in public life. The Governor is expected to be free from the passions and jealousies of the local party politics and hold the scales impartially between the various factors in the politics of the State. The Governor not only represents the Centre, but as the head of the State, serves his people and faithfully fights their battles with the Centre. He keeps in mind the overall national interests, not partisan party interests. He is supposed to be in tune with the people of the State he represents. The Constitution empowers him to influence the decisions of an elected Government by giving him the right to be consulted, to warn and to encourage. His role is overwhelmingly that of a friend, philosopher and guide to his council of Ministers with unrivalled discretionary powers.

List of Organizations of which the Governor, Madhya Pradesh is President/Chairman/Chief Patron/Patron etc. (As on 27-04-2019)
S.No. Name of Organization H.E.The Governor Officers & Designation Phone No
1. Amalgamated Ex-Serviceman Benevolent Fund,
Madhya Pradesh Sainik Kalyan, GTB Complex, Bhopal. (M.P.)
Chairman Director--> Brig.R.S.Nautiyal
Joint Director--> Capt.(IN) Alexander
0755-(2553992,2553743)
6261070410
2. Indian Red Cross Society,
Madhya Pradesh State Branch, Shiwaji Nagar, Bhopal. (M.P.)
President Chairman-->Mr.Ashutosh Purohit
General -Secretary-->Mrs. Prarthana Joshi
0755-(2550441,2551657)
9425087966
3. Madhya Pradesh Council for Child Welfare,
No-5 Hostel Piplani BHEL, Bhopal. (M.P.)
President Vice President-->Mr.
Secretary-->Mr. Anil Salwadia
0755-(2686851)
9926081171,8319520904
4. Environment Planning and Coordination Organization, EPCO,
1100 Qurt.Bhopal. (M.P.)
President Director General--> Mr. Malaya Shrivastava
Executive Director--> Mr.Jitendra Singh Raje
0755-(2466859,2464318)
Fax: 0755-
5. Madhya Pradesh State Tuberculosis Association,
Kamla Nehru Insitute, Idgah Hills, Bhopal. (M.P.)
Patron Working Chairman-->Smt. Manjula Ponda
Secretary-->Dr.G.P.Saxena
0755-(2665614,2665439)
9425019899,9516281911
6. Madhya Pradesh Bharat Scout & Guides,
Shyamla Hills, Bhopal. (M.P.)
Patron State Chief Commissioner--> Mr. Paraschandra Jain
State Secretary-->Smt. Anita Ankulnerkar
0755-(2661263,2737446)
9425377183
7. Madhya Pradesh Rashtra Bhasha Prachar Samiti,
Shyamla Hills, Bhopal. (M.P.)
Ex-officio Trustee Mantri/Director
Mr. Kailash Chandra Pant
0755-(2661087,2738612)
9826046792
8. . Madhya Pradesh Tulsi Manas Pratishthan,
Shyamla Hills, Bhopal. (M.P.)
Chief Patron Officiating Chairman-->Mr. Ramakant Dubey 0755-(2661196,2660010)
9406542897
9. Madhya Pradesh Welfare Association for the Blind,
Indore. (M.P.)
Chief Patron President-->Dr.M.V. Shirdhonkar 0731-(2410296,4096265)
9425380937
10. The Blind Relief Association,
Shiwaji Nagar,Bhopal. (M.P.)
Chief Patron President-->Mr. Naseer Husain 0755-(2552601)
9425005998
11. Co-ordination Committee of Universities of Madhya Pradesh. Chairman Governor of Madhya Pradesh.

  History of Raj Bhavan, Bhopal (M.P.)


Background : The Birth of Lal Kothi

       The erstwhile State of Bhopal and the Britishers signed an agreement under which the Britishers had appointed a Political Agent at Bhopal. This administrative decision was taken during the rule of Nawab Major Mohammad Khan (1816-1819). As per the agreement, a British armed force was also stationed at Sehore Cantt. Upto 1880, the area where the Raj Bhawan stands at present was a military cantonment area. No private construction was allowed in the area.

       In 1880, the present Raj Bhawan was constructed by Nawab Shahjahan Begum of Bhopal, as a place of stay for the British officers. It was initially named Lal Kothi. Thus, 1880 onwards, Lal Kothi became the official residence of the British Political Agents posted at Bhopal.

Name based on Appearance

       The Raj Bhawan's original name Lal Kothi was very much apt to the situation, for the following reasons :-

  • It was the first Kothi in the city of Bhopal with roof made of red China clay 'Kavelus'.
  • Besides, the predominant colour of the Kothi was red.
For these reasons, it came to be called as Lal Kothi in common parlance, and the name stuck with it for many years - up to the time India became independent.

Construction

       Some of the facts related to the construction of the Lal Kothi are as follows :-

  • Built in 1880 by the Nawab of Bhopal State, Begum Shahjahan.
  • It was based on European architecture.
  • It was built over an area of 15,423 sq. ft. (0.354 acres)
  • The total cost incurred on construction was Rs. 72,878,3 annas and one paisa.

Construction Sidelights

      

  • A prevalent custom in the then State of Bhopal (a Muslim State) was that whenever the State or the feudal lords constructed any building, the foundation stone for a mosque was laid first.
  • Thus, first of all a small mosque was built around the campus of Lal Kothi.
  • The erstwhile Bhopal Government had sought the help of the British and PWD authorities in decorating the Kothi on European lines.
  • Austate Cook (a French Engineer) was posted in those days as water works engineer at Bhopal.
  • In consultation with Mr. Cook, the map of Lal Kothi was prepared.
  • Construction of Lal Kothi was taken up under Mr. Cook's supervision.

Security
  • Special attention was paid to providing full and complete security to the British guests who would stay in Lal Kothi.
  • In 1880, the city of Bhopal was confined to Fort Fatehgarh (the remnants of this fort can be seen today around Hamidia Hospital and Gandhi Medical College).
  • Nawab Jahangir Mohammad Khan (1839-1840), father of Nawab Shahjahan Begum Sahiba built Kothi Jahangirabad outside the Fort Fatehgarh as a Cantonment for the Bhopal Regiment. (These days, the Headquarters of Madhya Pradesh Police is located in this Kothi)

  • Nawab Jahangir also established a Mohalla Jahangirabad (Civil habitation) thereon - at that time the only road leading to Jahangirabad from the old city of Bhopal passed through the Banganga Pullia. Till then Pul Pukhta was not in use for the road facility or transport - today, of course, it is a major link between Jahangirabad and the old city of Bhopal.

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आखिरी अद्यतन  : 08-01-2021
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