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Name Shri Lal Ji Tandon
Father's Name Shri Shivnarayan Tandon
Mother's Name Smt. Annpurna Devi
Date of Birth 12th April 1935
Birth Place Vill. Chowk, Distt. Lucknow ( Uttar Pradesh)
Maritial Status Married (26 th Feb. 1958)
Spouse Name Smt. Krishna Tandon
No. of Children Sons: 3
Qualifications Graduate
Special Interests Cattle rearing
Countries Visited Netherlands, Japan, New Zealand and United Arab Emirates (UAE)
  • 1978-84 and 1990-96
Member, Uttar Pradesh State Legislative Council (two terms)
  • 1991-92
Cabinet Minister, Department of Power, Govt. of Uttar Pradesh
  • 1996-2009
Member, Uttar Pradesh Legislative Assembly (Three Times)
  • 1997-99
Cabinet Minister, Urban Development and Water Supply, Govt. of Uttar Pradesh
  • 1997-2002
Leader of House, Uttar Pradesh Legislative Council
  • 1999-2000 and 2000-02
Cabinet Minister, Urban Development and Urban Poverty Alleviation, Govt. of Uttar Pradesh (two times)
  • 2002-03
Cabinet Minister, Housing, Finance, Urban Development and Tourism, Govt. of Uttar Pradesh
  • 2003-07
Leader of Opposition, Uttar Pradesh Legislative Assembly
  • 2009
Elected to 15th Lok Sabha (From Lucknow Lok Sabha Constituency)
  • from 6 Aug. 2009
Member, Committee on Estimates
  • from 31 Aug. 2009
Member, Committee on Railways
  • from 23.08.2018 to 28.07.2019
H.E. the Governor of Bihar


The objective of any higher education system should be to make it an instrument both of development and pursuit of the civilisational goals of society. It should be designed for imparting technical and other skills so that the youth is able to participate both in the process of social as well as economic development of the society. These goals' have been spelt out in their statements by the famous educationists through the last few decades, by the Education Commission of India and by the eminent visionaries like our former President Dr. Radhakrishnan.

The Governor is expected to be a person of undoubted ability and position in public life. The Governor is expected to be free from the passions and jealousies of the local party politics and hold the scales impartially between the various factors in the politics of the State. The Governor not only represents the Centre, but as the head of the State, serves his people and faithfully fights their battles with the Centre. He keeps in mind the overall national interests, not partisan party interests. He is supposed to be in tune with the people of the State he represents. The Constitution empowers him to influence the decisions of an elected Government by giving him the right to be consulted, to warn and to encourage. His role is overwhelmingly that of a friend, philosopher and guide to his council of Ministers with unrivalled discretionary powers.


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Pride Of INDIA

  • वर्ल्ड यूथ बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी Adrika and Kartik Story
  • डे-बोर्डिंग बैडमिंटन खिलाड़ी गौरांशी शर्मा

    राजधानी के टी टी नगर स्टेडियम में प्रशिक्षणरत डे-बोर्डिंग बैडमिंटन खिलाड़ी गौरांशी शर्मा चीन के ताइपे में 13 से 22 जुलाई तक आयोजित सेकेन्ड वर्ल्ड यूथ डीफ बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी। गौरांशी बालिका के अंडर-16 वर्ग में प्रतिभा प्रदर्शन करेंगी। भोपाल की प्रतिभावान खिलाड़ी गौरांशी शर्मा मध्य प्रदेश की एक मात्र खिलाड़ी हैं जिनका इस चैंपियनशिप के लिए चयन हुआ है।

  • वर्ल्ड यूथ डीफ बैडमिंटन चैंपियनशिप में भागीदारी के लिए गौरांशी मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना हुई। दिल्ली में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में गौरांशी शर्मा भाग लेंगी। दिल्ली रवाना होने से पूर्व मूक बधिर खिलाड़ी गौरांशी ने अपने मूक बधिर माता पिता के साथ प्रदेश के खेलमंत्री जीतू पटवारी से उनके निवास पर पहुंचकर भेंट की। खेलमंत्री ने गौरांशी शर्मा को बधाई दी। उन्होंने गौरांशी को चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करने और देश के लिए पदक जीतने के लिए शुभकामनाएं दी।

  • इस अवसर पर कालापीपल विधायक कुणाल चौधरी भी उपस्थित थे। गौरांशी ने खेल संचालक डॉ. थाउसेन ने गौरांशी शर्मा के वर्ल्ड यूथ डीफ बैडमिंटन चैंपियनशिप में चयनित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और उन्हें चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करते हुए अपनी शुभकामनाएं दी।

  • गौरतलब है कि दिल्ली में गत माह भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित ट्रायल में भारत के टॉप आठ खिलाडियों को बुलाया गया था। इनमें से चार खिलाडियों का चयन हुआ जिसमें गौरांशी भी शामिल थी। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि आशा निकेतन स्कूल में अध्ययनरत बारह वर्षीय गौरांशी शर्मा विगत तीन वर्षों से टी टी नगर स्टेडियम में बैडमिंटन प्रशिक्षक रश्मि मालवीय से बैडमिंटन खेल की बारीकियां सीख रहीं हैं।

Gandhi Ji

  • गांधी जी आत्‍मकथा Mahatma Gandhi Upvas
  • उपवास

    जिन दिनों मैंने दूध और अनाज को छोड़कर फलाहार का प्रयोग शुरू किया, उन्हीं दिनो संयम के हेतु से उपवास भी शुरू किये। मि. केलनबैक इसमें भी मेरे साथ हो गया। पहले मैं उपवास केवल आयोग्य की दृष्टि से करता था। एक मित्र की प्रेरणा से मैंने समझा कि देह दमन के लिए उपवास की आवश्यकता है। चूंकि मैं वैष्णव कुटुम्बे में पैदा हुआ था और चूंकि माताजी कठिन व्रतो का पालन करने वाली थी, इसलिए देश में एकादशी आदि व्रत मैंने किये थे। किन्तु वे देखा- देखी अथवा माता-पिता को प्रसन्न करने के विचार से किये थे। ऐसे व्रतों से कई लाभ होता है, इसे न तो मैं उस समय समझा था, न मानता ही था। किन्तु उस मित्र को उपवास करते देखकर और अपने ब्रहाचर्य व्रत को सहारा पहुंचाने के विचार से मैंने उनका अनुकण करना शुरू किया और एकादशी के दिन उपवास रखने का निश्चय किया। साधारणत: लोग एकादशी के दिन और फल खाकर समझते है कि उन्होंने एकादशी की है। पर फलाहारी उपवास तो अब मैं रोज ही करने लगा था। इसलिए मैंने पानी पानी की छूट रखकर पूरे उपवास शुरू किया। ।

  • उपवास के प्रयोगो के आरम्भिक दिनों में श्रावण का महीना पड़ता था। उस साल रमजान और श्रावण दोनो एकसाथ पड़े थे। गांधी कुटुम्ब ‍में वैष्णव व्रतों के साथ शैव व्रत भी पाले जाते थे। कुटुम्ब के लोग वैष्णव देवालयो की भांति ही शिवालयों में भी जाते थे। श्रावण महीने का प्रदोष- व्रत कुटुम्ब में कोई-न-कोई प्रतिवर्ष करता ही था। इसलिए इस श्रावण मास का व्रत मैंने रखना चाहा।

  • इस महत्वपूर्ण प्रयोग का प्रारम्भ टॉल्सटॉय आश्रम में हुआ था। वहां सत्याग्रही कैदियो के कुटुम्बो की देखरेख करते हुए कैलनबैक और मैं दोनो रहते थे। उनमें बालक और नौजवान भी थे। उनके लिए स्कूहल चलता था। इन नौजवानों में चार-पांच मुसलमान थे। इस्लाम के नियमों का पालन करने में मैं उनकी मदद करता था और उन्हेंक बढ़ावा देता था। नमाज वगैरा की सहूलियत कर देता था। आश्रम में पारसी और ईसाई भी थे। इन सबको अपने-अपने धर्मो के अनुसार चलने के लिए प्रोत्साहित करने का आश्रम में नियम था। अतएव मुसलमान नौजवानो को मैंने रोजे रखने के लिए उत्सााहित किया। मुझे तो प्रदोष-व्रत करना ही था। किन्तु मैंने हिन्दुओ, पारसियों और ईसाईयो को भी मुसलमान नौजवान का साथ देने की सलाह दी। मैंने उन्हें समझाया कि संयम के सब के साथ सहयोग करना स्तुनत्य है। बहुतेरे आश्रमवासियों ने मेरी बात मान ली। हिन्दू और पारसी मुसलमान साथियों को पूरा-पूरा अनुकरण नही करते थे, करना आवश्यक भी न था। मुसलमान सूरज डूबने की राह देखते थे, जब कि दूसरे उससे पहले खा लिया करते थे, जिससे वे मुसलमानो को परोस सके और उनके लिए विशेष वस्तुएं तैयार कर सकें। इसके सिवा, मुसलमान जो सरही (वह हलका भोजन जो रमजान के दिनों में रोजा रखने वाले मुसलमान कुछ रात रहते कर लेते है) खाते थे, उसमें दूसरो के सम्मिलित होने की आवश्यरकता न थी। और मुसलमान दिन में पानी भी न पीते थे, जबकि दूसरे लोग छूट से पानी पीते थे।

  • इस प्रयोग का एक परिणाम यह हुआ कि उपवास और एकाशन का महत्व सब समझने लगे। एक-दूसरे के प्रति उदारता और प्रेमभाव में वृद्धि हुई। आश्रम में अन्नाहार का नियम था। यह नियम मेरी भावना के कारण स्वीकार किया गया था,यह बात मुझे यहां आभारपूर्वक स्वीकार करनी चाहिए। रोजे के दिनों में मुसलमानो को मांस का त्याग कठिन प्रतीत हुआ, पर नवयुवको में से किसी ने मुझे उसका पता नही चलने दिया। वे आनन्द और रस-पूर्वक अन्नाहर करते थे। हिन्दू बालक आश्रम में अशोभनीय न लगने वाले स्‍वादिष्‍ठ भोजन भी उनके लिए तैयार करते थे।

  • अपने उपवास का वर्णन करते हुए यह विषयान्तर मैंने जान-बूझकर किया है, क्योंकि इस मधुर प्रसंग का वर्णन मैं दूसरी जगह नही कर सकता था। और, इस विषयान्तर के साथ मैंने अपनी एक आदत की भी चर्चा कर ली है। अपने विचार में मैं जो अच्छा काम करता हूं, उसमें अपने साथ रहनेवालो को सम्मिलित करने का प्रयत्न मैं हमेशा करता हूं। उपवास और एकाशन के प्रयोग नये थे, पर प्रदोष और रमजाना के बहाने मैंने सबको इसमें फॉद लिया।

  • इस प्रकार सहज ही आश्रम में संयम का वातावरण बढ़ा। दूसरे उपवासो और एकाशनो में भी आश्रमवासी सम्मिलित होने लगे। और,मैं मानता हूं कि इसका परिणाम शुभ निकला। सबके हृदयो पर संयम को कितना प्रभाव पड़ा, सबके विषयों को संयत करने में उपवास आदि ने कितना हाथ बटांया, यह मैं निश्चय पूर्वक न ही कह सकता। पर मेरा अनुभव यह है कि उपवास आदि से मुझ पर तो आरोग्य और विषय-नियमन की दृष्टि से बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा। फिर भी मैं यह जानता हूं कि उपवास आदि से सब पर इस तरह का प्रभाव पड़ेगा ही, ऐसा कोई अनिवार्य नियम नही है। इन्द्रय दमन के हेतु से किये गये उपवास से ही विषयों को संयम करने का परिणाम निकल सकता है। कुछ मित्रो का यह अनुभव भी है कि उपवास की समाप्ति पर विषयेच्छा और स्वाद तीव्र हो जाते है। मतलब यह कि उपवास के दिनों में विषय को संयत करने और स्वाद को जीतने की सतत भावनी बनी रहने पर ही उसका शुभ परिणाम निकल सकता है। यह मानना निरा भ्रम है कि बिना किसी हेतु के और बेमन किये जानेवाले शारीरिक उपवास का स्वतंत्र परिणाम विषय-वासना को संयत करने में आयेगा। गीताजी के दूसरे अध्याय का यह श्लोक यहां बहुत विचारणीय है:


    विषया विनिर्वते निराहारस्यआ देहिन:।
    रसवर्जं रसोडप्पास्यय पर दृष्ट्वा निवर्तत।।

  • ( उपवासी के विषय उपवास के दिनो के शान्त होते है, पर उसका रस नही जाता। रस तो ईश्वर-दर्शन से ही ईश्वर प्रसाद से ही शान्त होता है) तात्पर्य यह है कि संयमी के मार्ग में उपवास आदि एक साधन के रूप में है, किन्तु ये ही सब कुछ नही है। और यदि शरीर के उपवास के साथ मन का उपवास न हो तो उसकी परिणति दंभ में होती है और वह हानिकारक सिद्ध होता है।

Pride of MP

  • भाई बहन को मिली एक करोड़ की स्कालरशिप Srishti Deshmukh Success Story
  • अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटीज ने दाखिले के लिए ऑफर किया।

    राजधानी भोपाल या कहें कि प्रदेशभर के लिए यह गौरव की बात कही जा सकती है, यहां से ताल्लुक रखने वाले दो सेज भाई-बहन की अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटीज ने दाखिले के लिए ऑफर किया है। आधा दर्जन से ज्यादा विवि में से जिस यूनिवर्सिटी को इन भाई-बहन ने चुना है, उससे भी ज्यादा स्कॉलरशिप देने के लिए उन्हें प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने यूनिवर्सिटी की रैंकिंग को आधार बनाकर अपना सफर शुरू किया है। इन दोनों को अमेरिका की अलग-अलग यूनिवर्सिटी ने एक-एक करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप स्वीकृत कर अपने संस्थानों में दाखिला दिया है।

  • राजधानी के दिल्ली पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी सैयद शैजान शाहनवाज की बारहवीं कक्षा की रैंकिंग के बाद उन्हें अमेरिका की 6 टॉप यूनिवर्सिटीज ने अपने संसथान के लिए बुलावा भेजा था। इनमें मैरीलैंड यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ डिस्कोसिन मेडिसन, पैंसिल मैनिया, ऐरिजान स्टेट नॉर्थ कैरिलोना, वैरिजिना टॉस यूनिवर्सिटी शामिल हैं। शैजान ने इन सभी यूनिवर्सिटी में से बेहतर रैंकिंग रखने वाली यूनिवर्सिटी ऑफ डिस्कोसिन मेडिसन में पढ़ाई जारी रखने का इरादा किया है।

  • राजधानी की मीनाल रेसीडेंसी में निवास करने वाले मूलतः छतरपुर के निवासी सैयद शाहनवाज हाशमी और उनकी बेगम सैयदा दरख्शा हाशमी के लिए खुशियों का सिलसिला यहीं खत्म नही हुआ।

  • उनके हिस्से में खुशी की एक खबर उनकी बेटी उरुषा भी लेकर आई। उरुषा को भी अमेरिका की टॉप यूनिवर्सिटीज से प्रवेश ऑफर हासिल हुआ और पढ़ाई जारी रखने के लिए बड़ी स्कॉलरशिप भी उन्हें प्रस्तावित की गई। उरुषा ने भी अपने अम्मी-अब्बा की सहमति से इन यूनिवर्सिटीज में से पेन्सिल मैनिया मिसीगन यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए अपनी स्वीकृति दी है।

  • मप्र और भारत के अन्य प्रदेशों से 17 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के अमेरिका की यूनिवर्सिटी में एडमिशन के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 17 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले ही इस उपलब्धि को हासिल किया है। इन दोनों भाई - बहनों को अमेरिका की यूनिवर्सिटीज ने 1.24 लाख डॉलर (भारतीय मुद्रा करीब एक करोड़) की स्कॉलरशिप स्वीकृत की है।

  • शैजान और उरुषा के वालिद-वालिदा सैयद शाहनवाज और दरख्शा अपनी खुशी को बयां करने में अल्लाह का शुक्र अदा करना नहीं भूलते। वे कहते हैं कि ऐसे दौर में जब सारी दुनिया से इस बात की खबरें आ रहीं हैं कि एडमिशन के नाम पर करोड़ों रूपए की घूस लेनदेन किया जा रहा है, ऐसे में बिना किसी सिफारिश और बिना किसी ऊपरी खर्च के उनके बच्चों को अच्छी यूनिवर्सिटीज ने पढ़ाई का आसान मौका दिया है। वे दूसरे बच्चों को भी मेहनत से पढ़ाई करने और खुद को किसी से कमतर न आंकने की सलाह देते हुए कहतें हैं कि सच, मेहनत और सच्ची लगन का साथ कभी नाकामयाबी का मुंह नहीं देखने देगी।